धमतरी/ रुद्री रोड हनुमान मंदिर में चल रही हनुमान कथा में परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) के मुखार बृंद से दिव्य और अलौकिक जड़ी बूटियों से युक्त हवन संपन्न हुआ, हवन में काफी संख्या में भक्तगण और शिष्य लोग उपस्थित हुए। गुरु दीक्षा भी दी गई, इस हवान के माध्यम से जनकल्याण के साथ-साथ पर्यावरण की भी सुरक्षा होती है आसपास का वातावरण हवन के सुगंध से शुद्ध होता है। साथ में हम इस पूजा -पाठ के माध्यम से परमात्मा से जुड़े होते हैं।
बसंत पंचमी का महत्व में गुरुजी बताए कि पंचमी के दिन मां सरस्वती का अवतार हुआ था अंदर की पांच इंद्रियां का सदुपयोग करना, कर्में इंद्रिया का सदुपयोग हम कर पाते हैं किंतु ज्ञान इंद्रियों का सदुपयोग नहीं कर पाते अंदर के ज्ञान इन्द्रियां जब शुद्ध हो जाती है तब ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का अवतार होता है ,जब मां सरस्वती (ज्ञान) बढ़ जाता है तो अज्ञान नष्ट हो जाता है क्योंकि प्रकाश का भोजन ही अंधकार है ,अर्थात जिसके जीवन में अंधकार नष्ट हो जाता है उसके जीवन में बसंत छा जाता है उत्सव होता है भगवान कृष्ण गीता में समस्त ऋतुओ में स्वयं को वसंत ऋतु बताएं ,बसंत अर्थात.. उत्सव। जिसके अंदर ज्ञान आ गया , अज्ञान नष्ट हो गया ,जीवन में आनंद हो गया, उसके पास उत्सव आ जाता है। परमात्मा उत्सव में मुस्कुराहट में ही रहते हैं, विभिन्न रंगों के माध्यम से भगवान को विकार अर्पण करने को कहा गया, जब जीवन में उत्सव आता है तब आनंद की प्राप्ति होती है और उसी उत्सव में परमात्मा का निवास होता है हमेशा प्रसन्न रहने की बात बताई गई , आगे गुरुदेव बताएं कि लक्ष्मी जितना भी रहे किंतु जीवन को चलाने के लिए गणेश और सरस्वती की आवश्यकता होती है, ज्ञान ही जीवन को चलती है ,लक्ष्मी की प्राप्ति करने के लिए भी ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आवश्यकता होती है। ज्ञान के बिना सब कुछ व्यर्थ होता है। ज्ञान सबसे सर्वश्रेष्ठ होता है। काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही।